अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निपट निरंकुस निठुर निसंकू। जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू।।
मूल पाठ
निपट निरंकुस निठुर निसंकू। जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू।।
रूख कलपतरु सागरु खारा। तेहिं पठए बन राजकुमारा।।
स्रोत अभिलेख 2.119 · पुस्तक पृ. 442, 442
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह विधाता बिलकुल निरंकुश (स्वतन्त्र), निर्दय और निडर है, जिसने चन्द्रमाको रोगी (घटने-बढऩेवाला) और कलंकी बनाया, कल्पवृक्षको पेड़ और समुद्रको खारा बनाया। उसीने इन राजकुमारोंको वनमें भेजा है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 442 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निपट निरंकुस निठुर निसंकू। जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू।।
English explanation
The Creator is utterly unrestrained, cruel, and without misgiving—the one who made the moon afflicted and blemished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निपट | बिल्कुल | utterly |
| निरंकुस | निरंकुश; किसी अंकुश को न मानने वाला | unrestrained; unchecked |
| निठुर | निष्ठुर | cruel |
| निसंकू | निःशंक; बिना संकोच के | without fear or misgiving |
| जेहिं | जिसने | who |
| ससि | चंद्रमा को | the moon |
| कीन्ह | बनाया | made |
| सरुज | रोगयुक्त | afflicted with disease |
| सकलंकू | कलंकयुक्त; दाग वाला | blemished; marked with a stain |
2 रूख कलपतरु सागरु खारा। तेहिं पठए बन राजकुमारा।।
English explanation
The same Creator who made even the wish-fulfilling tree a tree and the ocean salty has sent the princes into the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रूख | वृक्ष; साधारण पेड़ | a tree; an ordinary tree |
| कलपतरु | कल्पवृक्ष; इच्छापूर्ति करने वाला वृक्ष | the wish-fulfilling tree |
| सागरु | समुद्र | the ocean |
| खारा | नमकीन | salty |
| तेहिं | उसी ने | that same one |
| पठए | भेजे | sent |
| बन | वन में | into the forest |
| राजकुमारा | राजकुमारों को; राम और लक्ष्मण को | the princes, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 442
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 442, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।