अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरत नारि नर अति पछिताहीं। देअहि दोषु देहिं मन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलौटते हुए वे स्त्री-पुरुष बहुत ही पछताते हैं और मन-ही-मन दैवको दोष देते हैं। परस्पर [बड़े ही] विषादके साथ कहते हैं कि विधाताके सभी काम उलटे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 442 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
फिरत नारि नर अति पछिताहीं। देअहि दोषु देहिं मन माहीं।।
सहित बिषाद परसपर कहहीं। बिधि करतब उलटे सब अहहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.119 · पुस्तक पृ. 442, 442
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 फिरत नारि नर अति पछिताहीं। देअहि दोषु देहिं मन माहीं।।
English explanation
Returning, the women and men grieve deeply and inwardly blame fate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरत | लौटते हुए | returning |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| अति | बहुत | deeply |
| पछिताहीं | पछताते हैं; दुखी होते हैं | lament; grieve |
| देअहि | दैव को | to fate |
| दोषु | दोष | blame |
| देहिं | देते हैं | give; assign |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में; भीतर ही | within; inwardly |
2 सहित बिषाद परसपर कहहीं। बिधि करतब उलटे सब अहहीं।।
English explanation
In sorrow they say to one another, “All the Creator’s works are contrary to what they should be.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ; युक्त | with; accompanied by |
| बिषाद | दुख | sorrow |
| परसपर | आपस में | to one another |
| कहहीं | कहते हैं | say |
| बिधि | विधाता के | the Creator’s |
| करतब | कार्य | deeds; works |
| उलटे | उलटे; विपरीत | contrary; topsy-turvy |
| सब | सभी | all |
| अहहीं | हैं | are |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 442
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 442, 442
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।