अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा।।
मूल पाठ
एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा।।
गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं। नईं नाव सब मातु चढ़ाईं।।
स्रोत अभिलेख 2.202 · पुस्तक पृ. 511, 512
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार रातभर सब लोग जागते रहे। सबेरा होते ही खेवा लगा। सुन्दर नावपर गुरुजीको चढ़ाकर फिर नयी नावपर सब माताओंको चढ़ाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 511 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा।।
English explanation
Thus everyone stayed awake through the night. Dawn came, and the river crossing began.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| राति | रात भर | through the night |
| लोगु | लोग | people |
| सबु | सब | all |
| जागा | जागते रहे | remained awake |
| भा | हुई | came |
| भिनुसार | भोर | dawn |
| गुदारा | नदी पार उतारने का काम | ferrying across the river |
| लागा | शुरू हुआ | began |
2 गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं। नईं नाव सब मातु चढ़ाईं।।
English explanation
The guru was helped aboard a fine, beautiful boat, and all the mothers were seated in new boats.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरहि | गुरु वसिष्ठ को | the guru Vashishtha |
| सुनावँ | अच्छी नाव पर | on a fine boat |
| चढ़ाइ | चढ़ाकर | having helped aboard |
| सुहाईं | सुंदर | beautiful |
| नईं | नई | new |
| नाव | नावों पर | in boats |
| सब | सभी | all |
| मातु | माताओं को | the mothers |
| चढ़ाईं | चढ़ाया | helped aboard |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.202
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 511
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 511, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।