अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा।।
मूल पाठ
दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा।।
स्रोत अभिलेख 2.202 · पुस्तक पृ. 511, 512
भावार्थ
मूल पाठ के बादचार घड़ीमें सब गङ्गाजीके पार उतर गये। तब भरतजीने उतरकर सबको सँभाला॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 511 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा।।
English explanation
Within four dandas, everyone had crossed. Bharata then disembarked and attended to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंड | दंड, समय की इकाई | danda, a unit of time |
| चारि | चार | four |
| महँ | के भीतर | within |
| भा | हो गया | became |
| सबु | सब लोग | everyone |
| पारा | पार | across |
| उतरि | उतरकर | having disembarked |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| तब | तब | then |
| सबहि | सभी को | everyone |
| सँभारा | सँभाला और सुधि ली | attended to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.202
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 511
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 511, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।