अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि भरतु फिरत बन माहीं। नेमु प्रेमु लखि मुनि सकुचाहीं।।
मूल पाठ
एहि बिधि भरतु फिरत बन माहीं। नेमु प्रेमु लखि मुनि सकुचाहीं।।
पुन्य जलाश्रय भूमि बिभागा। खग मृग तरु तृन गिरि बन बागा।।
स्रोत अभिलेख 2.312 · पुस्तक पृ. 605, 605
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार भरतजी वनमें फिर रहे हैं। उनके नियम और प्रेमको देखकर मुनि भी सकुचा जाते हैं। पवित्र जलके स्थान (नदी, बावली, कुण्ड आदि), पृथ्वीके पृथक्-पृथक् भाग, पक्षी, पशु, वृक्ष, तृण (घास), पर्वत, वन और बगीचे—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 605 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि भरतु फिरत बन माहीं। नेमु प्रेमु लखि मुनि सकुचाहीं।।
English explanation
AI draft meaning: Bharat wanders through the forest in this manner. Seeing his disciplined observance and love, the sage feels humbled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharat, Rama’s brother |
| फिरत | घूमते हैं | wanders |
| बन | वन | forest |
| माहीं | में | within |
| नेमु | नियमपालन | disciplined observance |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| लखि | देखकर | seeing |
| मुनि | मुनि | the sage |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | feels humbled |
2 पुन्य जलाश्रय भूमि बिभागा। खग मृग तरु तृन गिरि बन बागा।।
English explanation
Sacred bodies of water and varied tracts of land, birds, wild animals, trees, grasses, mountains, forests, and gardens—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुन्य | पवित्र | sacred |
| जलाश्रय | जलाशय | bodies of water |
| भूमि | भूमि | land |
| बिभागा | विभिन्न भाग | various tracts |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| तरु | वृक्ष | trees |
| तृन | घास | grasses |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| बन | वन | forests |
| बागा | बगीचे | gardens |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.312
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 605
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 605
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।