अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी।।
मूल पाठ
चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी।।
सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ। हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.312 · पुस्तक पृ. 605, 605
भावार्थ
मूल पाठ के बादसभी विशेषरूपसे सुन्दर, विचित्र, पवित्र और दिव्य देखकर भरतजी पूछते हैं और उनका प्रश्र सुनकर ऋषिराज अत्रिजी प्रसन्न मनसे सबके कारण, नाम, गुण और पुण्य-प्रभावको कहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 605 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी।।
English explanation
Seeing all these beautiful, wondrous, especially sacred and divine things, Bharat asks about them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारु | सुंदर | beautiful |
| बिचित्र | अनोखे और विविध | wondrous and varied |
| पबित्र | पवित्र | sacred |
| बिसेषी | विशेष रूप से | especially |
| बूझत | पूछते हैं | asks |
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharat, Rama’s brother |
| दिब्य | दिव्य | divine |
| सब | सब | all |
| देखी | देखकर | having seen |
2 सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ। हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ।।
English explanation
Hearing the questions, the chief sage joyfully explains their origins, names, qualities, and sacred significance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| मन | मन में | in heart |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| कहत | बताते हैं | explains |
| रिषिराऊ | मुनिराज | the chief sage |
| हेतु | कारण अथवा उत्पत्ति का प्रसंग | causes or origins |
| नाम | नाम | names |
| गुन | गुण | qualities |
| पुन्य | पवित्र | sacred |
| प्रभाऊ | महिमा और प्रभाव | significance and power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.312
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 605
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 605
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।