अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा। कतहुँ बिलोकत मन अभिरामा।।
मूल पाठ
कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा। कतहुँ बिलोकत मन अभिरामा।।
कतहुँ बैठि मुनि आयसु पाई। सुमिरत सीय सहित दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.312 · पुस्तक पृ. 605, 605
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजी कहीं स्नान करते हैं, कहीं प्रणाम करते हैं, कहीं मनोहर स्थानोंके दर्शन करते हैं और कहीं मुनि अत्रिजीकी आज्ञा पाकर बैठकर, सीताजीसहित श्रीराम-लक्ष्मण दोनों भाइयोंका स्मरण करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 605 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा। कतहुँ बिलोकत मन अभिरामा।।
English explanation
Bharat bathes at some places, bows at others, and elsewhere beholds sights delightful to the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कतहुँ | कहीं | at some places |
| निमज्जन | डुबकी लगाकर स्नान | bathing by immersion |
| कतहुँ | कहीं | at other places |
| प्रनामा | प्रणाम | bowing in reverence |
| कतहुँ | कहीं | elsewhere |
| बिलोकत | देखते हैं | beholds |
| मन | मन को | to the heart |
| अभिरामा | सुख देने वाले | delightful |
2 कतहुँ बैठि मुनि आयसु पाई। सुमिरत सीय सहित दोउ भाई।।
English explanation
Elsewhere, with the sage’s permission, he sits and remembers the two brothers, Rama and Lakshmana, together with Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कतहुँ | कहीं | elsewhere |
| बैठि | बैठकर | sitting down |
| मुनि | मुनि की | the sage’s |
| आयसु | अनुमति | permission |
| पाई | पाकर | having received |
| सुमिरत | स्मरण करते हैं | remembers |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सहित | साथ | together with |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.312
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 605
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 605
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।