अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि सुभाउ सनेहु सुसेवा। देहिं असीस मुदित बनदेवा।।
मूल पाठ
देखि सुभाउ सनेहु सुसेवा। देहिं असीस मुदित बनदेवा।।
फिरहिं गएँ दिनु पहर अढ़ाई। प्रभु पद कमल बिलोकहिं आई।।
स्रोत अभिलेख 2.312 · पुस्तक पृ. 605, 605
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीके स्वभाव, प्रेम और सुन्दर सेवाभावको देखकर वनदेवता आनन्दित होकर आशीर्वाद देते हैं। यों घूम-फिरकर ढाई पहर दिन बीतनेपर लौट पड़ते हैं और आकर प्रभु श्रीरघुनाथजीके चरणकमलोंका दर्शन करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 605 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि सुभाउ सनेहु सुसेवा। देहिं असीस मुदित बनदेवा।।
English explanation
Seeing Bharat’s good nature, affection, and devoted service, the forest deities joyfully give their blessings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| सुभाउ | अच्छा स्वभाव | good nature |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| सुसेवा | उत्तम सेवा | devoted service |
| देहिं | देते हैं | give |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| बनदेवा | वन के देवता | forest deities |
2 फिरहिं गएँ दिनु पहर अढ़ाई। प्रभु पद कमल बिलोकहिं आई।।
English explanation
When two and a half watches of the day have passed, Bharat returns and beholds Lord Rama’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरहिं | लौटते हैं | returns |
| गएँ | बीत जाने पर | when elapsed |
| दिनु | दिन के | of the day |
| पहर | पहर, समय का प्रहर | watches of time |
| अढ़ाई | ढाई | two and a half |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-सदृश | lotus-like |
| बिलोकहिं | दर्शन करते हैं | beholds reverently |
| आई | आकर | having come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.312
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 605
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 605
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।