अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी। खग मृग सुर तापस हितकारी।।
मूल पाठ
एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी। खग मृग सुर तापस हितकारी।।
कहेउँ राम बन गवनु सुहावा। सुनहु सुमंत्र अवध जिमि आवा।।
स्रोत अभिलेख 2.142 · पुस्तक पृ. 461, 462
भावार्थ
मूल पाठ के बादपक्षी, पशु, देवता और तपस्वियोंके हितकारी प्रभु इस प्रकार सुखपूर्वक वनमें निवास कर रहे हैं। तुलसीदासजी कहते हैं—मैंने श्रीरामचन्द्रजीका सुन्दर वनगमन कहा। अब जिस तरह सुमन्त्र अयोध्यामें आये वह [कथा] सुनो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 461 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी। खग मृग सुर तापस हितकारी।।
English explanation
In this way Lord Rama, who benefits birds, animals, gods, and ascetics, lives happily in the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बन | वन में | in the forest |
| बसहिं | रहते हैं | lives |
| सुखारी | सुखी; सुखपूर्वक | happy; happily |
| खग | पक्षियों के | of birds |
| मृग | पशुओं के | of animals |
| सुर | देवताओं के | of gods |
| तापस | तपस्वियों के | of ascetics |
| हितकारी | हित करने वाले | benefactor |
2 कहेउँ राम बन गवनु सुहावा। सुनहु सुमंत्र अवध जिमि आवा।।
English explanation
I have described Rama’s beautiful journey into the forest. Now hear how Sumantra returned to Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउँ | मैंने कहा; वर्णन किया | I have related |
| राम | राम का | Rama’s |
| बन | वन को | to the forest |
| गवनु | गमन; जाना | journey; departure |
| सुहावा | सुंदर; मनोहर | beautiful; lovely |
| सुनहु | सुनो | listen |
| सुमंत्र | सुमंत्र, दशरथ के मंत्री और सारथी | Sumantra, Dasharatha’s minister and charioteer |
| अवध | अयोध्या में | to Ayodhya |
| जिमि | जिस प्रकार | how |
| आवा | आए; लौटे | came; returned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.142
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 461
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 461, 462
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।