अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें। पलक बिलोचन गोलक जैसें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभु श्रीरामचन्द्रजी सीताजी और लक्ष्मणजीकी कैसी सँभाल रखते हैं, जैसे पलकें नेत्रोंके गोलकोंकी। इधर लक्ष्मणजी श्रीसीताजी और श्रीरामचन्द्रजीकी [अथवा लक्ष्मणजी और सीताजी श्रीरामचन्द्रजीकी] ऐसी सेवा करते हैं जैसे अज्ञानी मनुष्य शरीरकी करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 461 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें। पलक बिलोचन गोलक जैसें।।
सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि। जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि।।
स्रोत अभिलेख 2.142 · पुस्तक पृ. 461, 462
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें। पलक बिलोचन गोलक जैसें।।
English explanation
How does Lord Rama protect Sita and Lakshmana? As eyelids protect the eyeballs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोगवहिं | सँभालते हैं; रक्षा करते हैं | care for; protect |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सिय | सीता को | Sita |
| लखनहिं | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| कैसें | कैसे | how |
| पलक | पलकें | eyelids |
| बिलोचन | आँखों के | of the eyes |
| गोलक | गोलकों को | eyeballs |
| जैसें | जैसे | as |
2 सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि। जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि।।
English explanation
Lakshmana serves Sita and Rama as a person lacking discernment attends to his own body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवहिं | सेवा करते हैं | serves |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सीय | सीता की | Sita |
| रघुबीरहि | रघुवंश के वीर राम की | Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| जिमि | जैसे | as |
| अबिबेकी | विवेकहीन | lacking discernment |
| पुरुष | मनुष्य | a person |
| सरीरहि | अपने शरीर की | his own body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.142
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 461
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 461, 462
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।