अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि करत पंथ पछितावा। तमसा तीर तुरत रथु आवा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुमन्त्र इस प्रकार मार्गमें पछतावा कर रहे थे, इतनेमें ही रथ तुरंत तमसा नदीके तटपर आ पहुँचा। मन्त्रीने विनय करके चारों निषादोंको विदा किया। वे विषादसे व्याकुल होते हुए सुमन्त्रके पैरों पड़कर लौटे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 465 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि बिधि करत पंथ पछितावा। तमसा तीर तुरत रथु आवा।।
बिदा किए करि बिनय निषादा। फिरे पायँ परि बिकल बिषादा।।
स्रोत अभिलेख 2.147 · पुस्तक पृ. 465, 466
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि बिधि करत पंथ पछितावा। तमसा तीर तुरत रथु आवा।।
English explanation
As Sumantra lamented along the way, his chariot soon reached the bank of the Tamasa River.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| करत | करते हुए | while expressing |
| पंथ | रास्ते में | along the way |
| पछितावा | पछतावा; दुःखभरा खेद | regret; sorrowful lament |
| तमसा | तमसा नदी | the Tamasa River |
| तीर | तट पर | to the bank |
| तुरत | शीघ्र | soon |
| रथु | रथ | the chariot |
| आवा | आ पहुँचा | arrived |
2 बिदा किए करि बिनय निषादा। फिरे पायँ परि बिकल बिषादा।।
English explanation
Sumantra courteously bade the Nishadas farewell. They fell at his feet and returned, distraught with grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिदा | विदा | farewell |
| किए | किया; जाने दिया | bade; sent back |
| करि | करके | having made |
| बिनय | विनम्र निवेदन | a courteous request |
| निषादा | निषादों को | the Nishadas |
| फिरे | लौट गए | returned |
| पायँ | पैरों पर | at his feet |
| परि | गिरकर | having fallen |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बिषादा | शोक से | with grief |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.147
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 465
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 465, 466
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