अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पैठत नगर सचिव सकुचाई। जनु मारेसि गुर बाँभन गाई।।
मूल पाठ
पैठत नगर सचिव सकुचाई। जनु मारेसि गुर बाँभन गाई।।
बैठि बिटप तर दिवसु गवाँवा। साँझ समय तब अवसरु पावा।।
स्रोत अभिलेख 2.147 · पुस्तक पृ. 465, 466
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरमें प्रवेश करते मन्त्री [ग्लानिके कारण] ऐसे सकुचाते हैं, मानो गुरु, ब्राह्मण या गौको मारकर आये हों। सारा दिन एक पेड़के नीचे बैठकर बिताया। जब सन्ध्या हुई तब मौका मिला॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 466 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पैठत नगर सचिव सकुचाई। जनु मारेसि गुर बाँभन गाई।।
English explanation
As he entered the city, the minister Sumantra felt ashamed and hesitant, as though he had killed a spiritual teacher, a Brahmin, or a cow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पैठत | प्रवेश करते हुए | while entering |
| नगर | नगर में | the city |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| सकुचाई | संकोच और लज्जा से भर गए | felt ashamed and hesitant |
| जनु | मानो | as though |
| मारेसि | उन्होंने मार डाला हो | he had killed |
| गुर | गुरु को | a spiritual teacher |
| बाँभन | ब्राह्मण को | a Brahmin |
| गाई | गाय को | a cow |
2 बैठि बिटप तर दिवसु गवाँवा। साँझ समय तब अवसरु पावा।।
English explanation
Sumantra spent the day sitting beneath a tree; then, at dusk, he found an opportunity to enter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठि | बैठकर | sitting |
| बिटप | पेड़ | a tree |
| तर | के नीचे | beneath |
| दिवसु | दिन | the day |
| गवाँवा | बिता दिया | spent |
| साँझ | साँझ | evening |
| समय | के समय | at the time of |
| तब | तब | then |
| अवसरु | अवसर | an opportunity |
| पावा | पाया | found |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.147
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 466
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 465, 466
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।