अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना।।
मूल पाठ
एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना।।
पुनि धरि धीर कहइ नरनाहू। लै रथु संग सखा तुम्ह जाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.81 · पुस्तक पृ. 410, 411
भावार्थ
मूल पाठ के बादइससे अधिक बलवती और कौन-सी व्यथा होगी जिस दु:खको पाकर प्राण शरीरको छोड़ेंगे। फिर धीरज धरकर राजाने कहा—हे सखा! तुम रथ लेकर श्रीरामके साथ जाओ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 411 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना।।
English explanation
What suffering could be greater than this, whose pain would make the life-breath leave the body?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस पीड़ा | this suffering |
| तें | से | than |
| कवन | कौन-सी | what |
| ब्यथा | पीड़ा | suffering |
| बलवाना | अधिक प्रबल | more powerful |
| जो | जिसका | whose |
| दुखु | दुःख | pain |
| पाइ | पाकर | having experienced |
| तजहिं | छोड़ दें | would abandon |
| तनु | शरीर को | the body |
| प्राना | प्राण | the life-breath |
2 पुनि धरि धीर कहइ नरनाहू। लै रथु संग सखा तुम्ह जाहू।।
English explanation
Then, steadying himself, the king said, ‘Friend, take the chariot and go with them.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| धरि | धारण करके | having mustered |
| धीर | धैर्य | composure |
| कहइ | कहते हैं | says |
| नरनाहू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| लै | लेकर | taking |
| रथु | रथ | the chariot |
| संग | उनके साथ | with them |
| सखा | हे मित्र | friend |
| तुम्ह | तुम | you |
| जाहू | जाओ | go |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 411
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 410, 411
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।