अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गइ मुरुछा तब भूपति जागे। बोलि सुमंत्रु कहन अस लागे।।
मूल पाठ
गइ मुरुछा तब भूपति जागे। बोलि सुमंत्रु कहन अस लागे।।
रामु चले बन प्रान न जाहीं। केहि सुख लागि रहत तन माहीं।
स्रोत अभिलेख 2.81 · पुस्तक पृ. 410, 411
भावार्थ
मूल पाठ के बादमूर्छा दूर हुई, तब राजा जागे और सुमन्त्रको बुलाकर ऐसा कहने लगे—श्रीराम वनको चले गये, पर मेरे प्राण नहीं जा रहे हैं। न जाने ये किस सुखके लिये शरीरमें टिक रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 410 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गइ मुरुछा तब भूपति जागे। बोलि सुमंत्रु कहन अस लागे।।
English explanation
When his faint passed, King Dasharatha regained consciousness. Calling Sumantra, he began to speak as follows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गइ | दूर हुई | passed away |
| मुरुछा | मूर्च्छा; बेहोशी | faint; unconsciousness |
| तब | तब | then |
| भूपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| जागे | चेतना में आए | regained consciousness |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| सुमंत्रु | सुमंत्र, राजा के मंत्री और सारथी को | Sumantra, the king’s minister and charioteer |
| कहन | कहने | to speak |
| अस | इस प्रकार | thus |
| लागे | लगे | began |
2 रामु चले बन प्रान न जाहीं। केहि सुख लागि रहत तन माहीं।
English explanation
Rama has left for the forest, yet my life does not depart. For what happiness does it remain in my body?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| चले | चले गए | have departed |
| बन | वन को | for the forest |
| प्रान | मेरे प्राण | my life-breath |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | निकलते | depart |
| केहि | किस | what |
| सुख | सुख | happiness |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| रहत | टिके रहते हैं | remain |
| तन | शरीर | the body |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 410
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 410, 411
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।