अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके चलते ही बड़ा भारी विषाद हो गया। नगरका आर्तनाद (हाहाकार) सुना नहीं जाता। लङ्कामें बुरे शकुन होने लगे, अयोध्यामें अत्यन्त शोक छा गया और देवलोकमें सब हर्ष और विषाद दोनोंके वशमें हो गये। [हर्ष इस बातका था कि अब राक्षसोंका नाश होगा और विषाद अयोध्यावासियोंके शोकके कारण था।]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 410 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू।।
कुसगुन लंक अवध अति सोकू। हहरष बिषाद बिबस सुरलोकू।।
स्रोत अभिलेख 2.81 · पुस्तक पृ. 410, 411
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू।।
English explanation
As Rama departed, immense sorrow arose; the city’s anguished cries were unbearable to hear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama |
| चलत | चलते समय | as he departed |
| अति | अत्यंत | immense |
| भयउ | हुआ | arose |
| बिषादू | विषाद; उदासी | sorrow |
| सुनि | सुना | heard |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | could be |
| पुर | नगर का | of the city |
| आरत | दुःखभरा | anguished |
| नादू | विलाप का स्वर | cry of lamentation |
2 कुसगुन लंक अवध अति सोकू। हहरष बिषाद बिबस सुरलोकू।।
English explanation
There were ill omens in Lanka and deep grief in Ayodhya, while the heavenly realm was overcome by joy and sorrow; the reading ‘हहरष’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुसगुन | अपशकुन | ill omens |
| लंक | लंका में | in Lanka |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| अति | अत्यंत | great |
| सोकू | शोक | grief |
| हहरष | हर्ष | joy |
| बिषाद | विषाद | sorrow |
| बिबस | विवश; अभिभूत | overcome |
| सुरलोकू | देवताओं का लोक | the heavenly realm of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 410
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 410, 411
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।