अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाई पठयउ दोउ भाई।।
मूल पाठ
एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाई पठयउ दोउ भाई।।
सुनि मुनि आयसु धावन धाए। चले बेग बर बाजि लजाए।।
स्रोत अभिलेख 2.157 · पुस्तक पृ. 473, 474
भावार्थ
मूल पाठ के बादजाकर भरतसे इतना ही कहना कि दोनों भाइयोंको गुरुजीने बुलवा भेजा है। मुनिकी आज्ञा सुनकर धावन (दूत) दौड़े। वे अपने वेगसे उत्तम घोड़ोंको भी लजाते हुए चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 474 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाई पठयउ दोउ भाई।।
English explanation
Go and tell Bharata only this: the guru has sent for both brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एतनेइ | इतना ही | only this much |
| कहेहु | कहना | tell |
| भरत | भरत | Bharata |
| सन | से | to |
| जाई | जाकर | having gone |
| गुर | गुरु वसिष्ठ ने | Guru Vasishtha |
| बोलाई | बुलाने के लिए | to summon |
| पठयउ | भेजा है | has sent |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाइयों को, भरत और शत्रुघ्न को | brothers, Bharata and Shatrughna |
2 सुनि मुनि आयसु धावन धाए। चले बेग बर बाजि लजाए।।
English explanation
Hearing the sage’s command, the courier messengers raced off. They moved so swiftly that they put even excellent horses to shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ की | of Sage Vasishtha |
| आयसु | आज्ञा | command |
| धावन | धावक दूत | courier runners |
| धाए | दौड़ पड़े | raced off |
| चले | चले | traveled |
| बेग | वेग से | with speed |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बाजि | घोड़ों को | horses |
| लजाए | लज्जित करते हुए | putting to shame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.157
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 474
- सहायक विषय
- मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 473, 474
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