अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अनरथु अवध अरंभेउ जब तें। कुसगुन होहिं भरत कहुँ तब तें।।
मूल पाठ
अनरथु अवध अरंभेउ जब तें। कुसगुन होहिं भरत कहुँ तब तें।।
देखहिं राति भयानक सपना। जागि करहिं कटु कोटि कलपना।।
स्रोत अभिलेख 2.157 · पुस्तक पृ. 473, 474
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे अयोध्यामें अनर्थ प्रारम्भ हुआ, तभीसे भरतजीको अपशकुन होने लगे। वे रातको भयङ्कर स्वप्र देखते थे और जागनेपर [उन स्वप्रोंके कारण] करोड़ों (अनेकों) तरहकी बुरी-बुरी कल्पनाएँ किया करते थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 474 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अनरथु अवध अरंभेउ जब तें। कुसगुन होहिं भरत कहुँ तब तें।।
English explanation
Ever since calamity began in Ayodhya, Bharata had been experiencing ill omens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनरथु | अनर्थ | calamity |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| अरंभेउ | आरंभ हुआ | began |
| जब | जब | when |
| तें | से | since |
| कुसगुन | अपशकुन | ill omens |
| होहिं | होने लगे | began occurring |
| भरत | भरत | Bharata |
| कहुँ | को | for |
| तब | तब | then |
| तें | से | from; since |
2 देखहिं राति भयानक सपना। जागि करहिं कटु कोटि कलपना।।
English explanation
Bharata saw terrifying dreams at night and, upon waking, entertained countless distressing apprehensions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखहिं | देखते थे | would see |
| राति | रात में | at night |
| भयानक | भयानक | terrifying |
| सपना | सपने | dreams |
| जागि | जागकर | upon waking |
| करहिं | करते थे | would entertain |
| कटु | दुःखद | distressing |
| कोटि | करोड़ों; असंख्य | millions; countless |
| कलपना | कल्पनाएँ और आशंकाएँ | imaginings and apprehensions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.157
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 474
- सहायक विषय
- मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 473, 474
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