अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[अनिष्टशान्तिके लिये] वे प्रतिदिन ब्राह्मणोंको भोजन कराकर दान देते थे। अनेकों विधियोंसे रुद्राभिषेक करते थे। महादेवजीको हृदयमें मनाकर उनसे माता-पिता, कुटुम्बी और भाइयोंका कुशल-क्षेम माँगते थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 474 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना।।
मागहिं हृदयँ महेस मनाई। कुसल मातु पितु परिजन भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.157 · पुस्तक पृ. 473, 474
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना।।
English explanation
Each day he fed Brahmins and gave gifts, and performed ritual bathing of Shiva in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मणों को | Brahmins |
| जेवाँइ | भोजन कराकर | having fed |
| देहिं | देते थे | would give |
| दिन | प्रतिदिन | daily |
| दाना | दान | charitable gifts |
| सिव | भगवान शिव का | of Lord Shiva |
| अभिषेक | अनुष्ठानिक स्नान | ritual bathing |
| करहिं | करते थे | would perform |
| बिधि | विधियों से | by methods |
| नाना | विविध | various |
2 मागहिं हृदयँ महेस मनाई। कुसल मातु पितु परिजन भाई।।
English explanation
Appealing to Shiva from his heart, he prayed for the well-being of his mothers, father, relatives, and brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागहिं | माँगते थे | would pray for |
| हृदयँ | हृदय से; मन में | from the heart; inwardly |
| महेस | महेश, भगवान शिव को | Mahesha, Lord Shiva |
| मनाई | प्रसन्न करके; विनय करके | having propitiated; appealing to |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| मातु | माताओं की | of his mothers |
| पितु | पिता की | of his father |
| परिजन | परिजनों की | of his relatives |
| भाई | भाइयों की | of his brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.157
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 474
- सहायक विषय
- मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 473, 474
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।