अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक निमेष बरस सम जाई। एहि बिधि भरत नगर निअराई।।
मूल पाठ
एक निमेष बरस सम जाई। एहि बिधि भरत नगर निअराई।।
असगुन होहिं नगर पैठारा। रटहिं कुभाँति कुखेत करारा।।
स्रोत अभिलेख 2.158 · पुस्तक पृ. 474, 475
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक-एक निमेष वर्षके समान बीत रहा था। इस प्रकार भरतजी नगरके निकट पहुँचे। नगरमें प्रवेश करते समय अपशकुन होने लगे। कौए बुरी जगह बैठकर बुरी तरहसे काँव-काँव कर रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 474 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एक निमेष बरस सम जाई। एहि बिधि भरत नगर निअराई।।
English explanation
A single instant passed like a year. In this way, Bharata drew near the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| निमेष | पलक झपकने भर का समय | an instant |
| बरस | वर्ष | a year |
| सम | के समान | like |
| जाई | बीतता है | passes |
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| नगर | नगर के | the city |
| निअराई | निकट पहुँचे | drew near |
2 असगुन होहिं नगर पैठारा। रटहिं कुभाँति कुखेत करारा।।
English explanation
Ill omens appeared as he entered the city; crows cried harshly and ominously from inauspicious places.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असगुन | अपशकुन | ill omens |
| होहिं | होते हैं | occur |
| नगर | नगर में | into the city |
| पैठारा | प्रवेश करते समय | upon entering |
| रटहिं | बार-बार बोलते हैं | cry repeatedly |
| कुभाँति | बुरी, अशुभ रीति से | in an ominous manner |
| कुखेत | अशुभ स्थानों पर | in inauspicious places |
| करारा | कर्कश स्वर में | harshly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.158
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 474
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 474, 475
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।