अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खर सिआर बोलहिं प्रतिकूला। सुनि सुनि होइ भरत मन सूला।।
मूल पाठ
खर सिआर बोलहिं प्रतिकूला। सुनि सुनि होइ भरत मन सूला।।
श्रीहत सर सरिता बन बागा। नगरु बिसेषि भयावनु लागा।।
स्रोत अभिलेख 2.158 · पुस्तक पृ. 474, 475
भावार्थ
मूल पाठ के बादगदहे और सियार विपरीत बोल रहे हैं। यह सुन-सुनकर भरतके मनमें बड़ी पीड़ा हो रही है। तालाब, नदी, वन, बगीचे सब शोभाहीन हो रहे हैं। नगर बहुत ही भयानक लग रहा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 475 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 खर सिआर बोलहिं प्रतिकूला। सुनि सुनि होइ भरत मन सूला।।
English explanation
Donkeys and jackals called ominously; hearing them again and again brought anguish to Bharata’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खर | गधे | donkeys |
| सिआर | सियार | jackals |
| बोलहिं | बोलते हैं | call |
| प्रतिकूला | अशुभ ढंग से | ominously |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुनि | फिर सुनकर | hearing again |
| होइ | होती है | arises |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| मन | मन में | in the heart |
| सूला | तीव्र पीड़ा | piercing anguish |
2 श्रीहत सर सरिता बन बागा। नगरु बिसेषि भयावनु लागा।।
English explanation
The lakes, rivers, forests, and gardens had lost their beauty; the city seemed especially frightening.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीहत | शोभा से रहित | bereft of beauty |
| सर | सरोवर | lakes |
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| बन | वन | forests |
| बागा | बाग | gardens |
| नगरु | नगर | the city |
| बिसेषि | विशेष रूप से | especially |
| भयावनु | भयावना | frightening |
| लागा | लगा | seemed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.158
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 475
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 474, 475
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।