अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके वियोगरूपी बुरे रोगसे सताये हुए पक्षी-पशु, घोड़े-हाथी [ऐसे दुखी हो रहे हैं कि] देखे नहीं जाते। नगरके स्त्री-पुरुष अत्यन्त दुखी हो रहे हैं। मानो सब अपनी सारी सम्पत्ति हार बैठे हों॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 475 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए।।
नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी।।
स्रोत अभिलेख 2.158 · पुस्तक पृ. 474, 475
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए।।
English explanation
The condition of the birds, wild animals, horses, and elephants was unbearable to behold; the grievous malady of separation from Rama had left them stricken.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| जाहिं | जा सकते हैं | can be |
| न | नहीं | not |
| जोए | देखे | looked upon |
| राम | राम के | from Rama |
| बियोग | वियोग रूपी | separation, conceived as |
| कुरोग | बुरे रोग ने | a grievous malady |
| बिगोए | बेहाल कर दिए | had left stricken |
2 नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी।।
English explanation
The women and men of the city were utterly sorrowful, as though everyone had lost all their wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नगर | नगर के | of the city |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| निपट | अत्यंत | utterly |
| दुखारी | दुखी | sorrowful |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सबन्हि | सभी ने | everyone had |
| सब | सारी | all |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| हारी | खो दी | lost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.158
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 475
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 474, 475
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।