अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक कहहिं हम बहुत न जानहिं। आपुहि परम धन्य करि मानहिं।।
मूल पाठ
एक कहहिं हम बहुत न जानहिं। आपुहि परम धन्य करि मानहिं।।
ते पुनि पुन्यपुंज हम लेखे। जे देखहिं देखिहहिं जिन्ह देखे।।
स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 443, 444
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोई एक कहते हैं—हम बहुत नहीं जानते। हाँ, अपनेको परम धन्य अवश्य मानते हैं [जो इनके दर्शन कर रहे हैं] और हमारी समझमें वे भी बड़े पुण्यवान् हैं जिन्होंने इनको देखा है, जो देख रहे हैं और जो देखेंगे॥ ४ ॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 443 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एक कहहिं हम बहुत न जानहिं। आपुहि परम धन्य करि मानहिं।।
English explanation
Some say: We do not know much; we simply consider ourselves most fortunate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | कुछ लोग | some people |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| हम | हम | we |
| बहुत | बहुत कुछ | much |
| न | नहीं | not |
| जानहिं | जानते | know |
| आपुहि | अपने ही को | ourselves |
| परम | अत्यंत | supremely |
| धन्य | धन्य; सौभाग्यशाली | blessed; fortunate |
| करि | करके; समझकर | as; regarding as |
| मानहिं | मानते हैं | consider |
2 ते पुनि पुन्यपुंज हम लेखे। जे देखहिं देखिहहिं जिन्ह देखे।।
English explanation
In our view, those who see them, will see them, or have seen them are storehouses of merit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those people |
| पुनि | तो; फिर | indeed; in turn |
| पुन्यपुंज | पुण्य के भंडार | storehouses of merit |
| हम | हमारे | our |
| लेखे | विचार में | in estimation |
| जे | जो | who |
| देखहिं | इन्हें देखते हैं | see them |
| देखिहहिं | इन्हें देखेंगे | will see them |
| जिन्ह | जिन्होंने | those who |
| देखे | इन्हें देखा है | have seen them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 443
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 443, 444
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।