अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एकु मनोरथु बड़ मन माहीं। सभयँ सकोच जात कहि नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमेरे मनमें एक और बड़ा मनोरथ है, जो भय और संकोचके कारण कहा नहीं जाता। [श्रीरामचन्द्रजीने कहा—] हे भाई! कहो। तब प्रभुकी आज्ञा पाकर भरतजी स्नेहपूर्ण सुन्दर वाणी बोले—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 601 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एकु मनोरथु बड़ मन माहीं। सभयँ सकोच जात कहि नाहीं।।
कहहु तात प्रभु आयसु पाई। बोले बानि सनेह सुहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.308 · पुस्तक पृ. 601, 602
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एकु मनोरथु बड़ मन माहीं। सभयँ सकोच जात कहि नाहीं।।
English explanation
I have one great wish in my heart, but fear and hesitation keep me from expressing it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकु | एक | one |
| मनोरथु | अभिलाषा | wish |
| बड़ | बड़ी | great |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
| सभयँ | भय के कारण | through fear |
| सकोच | संकोच के कारण | through hesitation |
| जात | जा सकती | can be |
| कहि | कही | expressed |
| नाहीं | नहीं | not |
2 कहहु तात प्रभु आयसु पाई। बोले बानि सनेह सुहाई।।
English explanation
Rama said, ‘Speak, dear one.’ Receiving his lord’s permission, Bharata spoke in lovely, affectionate words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | कहो | speak |
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| आयसु | अनुमति | permission |
| पाई | पाकर | having received |
| बोले | बोले | spoke |
| बानि | वाणी | words |
| सनेह | स्नेह से भरी | affectionate |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.308
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 601
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 601, 602
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।