अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चित्रकूट सुचि थल तीरथ बन। खग मृग सर सरि निर्झर गिरिगन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआज्ञा हो तो चित्रकूटके पवित्र स्थान, तीर्थ, वन, पक्षी-पशु, तालाब-नदी, झरने और पर्वतोंके समूह तथा विशेषकर प्रभु (आप) के चरणचिह्नोंसे अंकित भूमिको देख आऊँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 602 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चित्रकूट सुचि थल तीरथ बन। खग मृग सर सरि निर्झर गिरिगन।।
प्रभु पद अंकित अवनि बिसेषी। आयसु होइ त आवौं देखी।।
स्रोत अभिलेख 2.308 · पुस्तक पृ. 601, 602
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चित्रकूट सुचि थल तीरथ बन। खग मृग सर सरि निर्झर गिरिगन।।
English explanation
Chitrakuta’s sacred places, pilgrimage sites, forests, birds, wild animals, lakes, rivers, waterfalls, and groups of hills—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चित्रकूट | चित्रकूट क्षेत्र के | of the Chitrakuta region |
| सुचि | पवित्र | sacred |
| थल | स्थल | places |
| तीरथ | तीर्थस्थान | pilgrimage sites |
| बन | वन | forests |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| सर | सरोवर | lakes |
| सरि | नदियाँ | rivers |
| निर्झर | झरने | waterfalls |
| गिरिगन | पर्वतों के समूह | groups of hills |
2 प्रभु पद अंकित अवनि बिसेषी। आयसु होइ त आवौं देखी।।
English explanation
Especially the ground marked by my lord’s footprints—if permitted, I would go see these and return.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों से | by the feet |
| अंकित | चिह्नित | marked |
| अवनि | भूमि | ground |
| बिसेषी | विशेषकर | especially |
| आयसु | अनुमति | permission |
| होइ | हो | is granted |
| त | तो | then |
| आवौं | मैं लौट आऊँ | I would return |
| देखी | देखकर | having seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.308
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 602
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 601, 602
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।