अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे रघुकुलके गुरु (बड़ेरे मूलपुरुष) सूर्यभगवान्! आप अपना उदय न करें। अयोध्याको [बेहाल] देखकर आपके हृदयमें बड़ी पीड़ा होगी। राजाकी प्रीति और कैकेयीकी निष्ठुरता दोनोंको ब्रह्माने सीमातक रचकर बनाया है (अर्थात् राजा प्रेमकी सीमा हैं और कैकेयी निष्ठुरताकी)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 374 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर।।
भूप प्रीति कैकइ कठिनाई। उभय अवधि बिधि रची बनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.37 · पुस्तक पृ. 374, 375
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर।।
English explanation
O Sun, revered guide of Raghu’s lineage, do not rise; seeing Ayodhya will bring anguish to your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदउ | उदय | rising |
| करहु | करो | do |
| जनि | मत | do not |
| रबि | हे सूर्य | O Sun |
| रघुकुल | रघु के वंश के | of Raghu’s lineage |
| गुर | गुरु, पूज्य मार्गदर्शक | revered guide |
| अवध | अयोध्या को | Ayodhya |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| सूल | तीव्र पीड़ा | sharp anguish |
| होइहि | होगी | will arise |
| उर | हृदय में | in your heart |
2 भूप प्रीति कैकइ कठिनाई। उभय अवधि बिधि रची बनाई।।
English explanation
The Creator fashioned both the king’s love and Kaikeyi’s hardness at their utmost limits.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ का | King Dasharatha’s |
| प्रीति | प्रेम | love |
| कैकइ | रानी कैकेयी की | Queen Kaikeyi’s |
| कठिनाई | कठोरता | hardness of heart |
| उभय | दोनों की | of both |
| अवधि | चरम सीमा | utmost limit |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| रची | रची | fashioned |
| बनाई | बना दी | brought into being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 374
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 374, 375
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।