अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा।।
मूल पाठ
बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा।।
पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक। सुनत नृपहि जनु लागहिं सायक।।
स्रोत अभिलेख 2.37 · पुस्तक पृ. 374, 375
भावार्थ
मूल पाठ के बादविलाप करते-करते ही राजाको सबेरा हो गया। राजद्वारपर वीणा, बाँसुरी और शंखकी ध्वनि होने लगी। भाटलोग विरुदावली पढ़ रहे हैं और गवैये गुणोंका गान कर रहे हैं। सुननेपर राजाको वे बाण-जैसे लगते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 374 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा।।
English explanation
As the king lamented, dawn arrived; the sounds of lutes, flutes, and conches arose at the doorway.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिलपत | विलाप करते हुए | while lamenting |
| नृपहि | राजा के लिए | for the king |
| भयउ | हो गया | came |
| भिनुसारा | प्रातःकाल | daybreak |
| बीना | वीणा | lute |
| बेनु | बाँसुरी | flute |
| संख | शंख | conch |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| द्वारा | द्वार पर | at the doorway |
2 पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक। सुनत नृपहि जनु लागहिं सायक।।
English explanation
Bards recite praises and singers sing of virtues; hearing them, the king feels as though arrows are striking him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पढ़हिं | पढ़ते, पाठ करते हैं | recite |
| भाट | प्रशस्ति सुनाने वाले भाट | praise-reciting bards |
| गुन | गुणों का | virtues |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| गायक | गायक | singers |
| सुनत | सुनते हुए | on hearing |
| नृपहि | राजा को | to the king |
| जनु | मानो | as though |
| लागहिं | लगते हैं | strike |
| सायक | बाण | arrows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 374
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 374, 375
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।