अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें।।
मूल पाठ
मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें।।
तेहिं निसि नीद परी नहि काहू। राम दरस लालसा उछाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.37 · पुस्तक पृ. 374, 375
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाको ये सब मङ्गल-साज कैसे नहीं सुहा रहे हैं, जैसे पतिके साथ सती होनेवाली स्त्रीको आभूषण! श्रीरामचन्द्रजीके दर्शनकी लालसा और उत्साहके कारण उस रात्रिमें किसीको भी नींद नहीं आयी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 375 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें।।
English explanation
None of the auspicious festivities pleases him, just as ornaments do not please a woman about to accompany her husband onto his funeral pyre.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | मंगल आयोजन | auspicious festivities |
| सकल | सभी | all |
| सोहाहिं | सुहाते हैं | please or seem fitting |
| न | नहीं | not |
| कैसें | किसी तरह | in any way |
| सहगामिनिहि | पति की चिता के साथ जाने वाली स्त्री को | to a woman going onto her husband’s funeral pyre |
| बिभूषन | आभूषण | ornaments |
| जैसें | जैसे | just as |
2 तेहिं निसि नीद परी नहि काहू। राम दरस लालसा उछाहू।।
English explanation
That night no one slept; all were eager and excited to see Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उस | that |
| निसि | रात | night |
| नीद | नींद | sleep |
| परी | आई | came |
| नहि | नहीं | not |
| काहू | किसी को | to anyone |
| राम | राम के | of Rama |
| दरस | दर्शन की | seeing |
| लालसा | लालसा | longing |
| उछाहू | उत्साह | excitement |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 375
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 374, 375
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