अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उतरु न आव बिकल बैदेही। तजन चहत सुचि स्वामि सनेही।।
मूल पाठ
उतरु न आव बिकल बैदेही। तजन चहत सुचि स्वामि सनेही।।
बरबस रोकि बिलोचन बारी। धरि धीरजु उर अवनिकुमारी।।
स्रोत अभिलेख 2.64 · पुस्तक पृ. 396, 397
भावार्थ
मूल पाठ के बादजानकीजीसे कुछ उत्तर देते नहीं बनता, वे यह सोचकर व्याकुल हो उठीं कि मेरे पवित्र और प्रेमी स्वामी मुझे छोड़ जाना चाहते हैं। नेत्रोंके जल (आँसुओं) को जबर्दस्ती रोककर वे पृथ्वीकी कन्या सीताजी हृदयमें धीरज धरकर,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 396 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उतरु न आव बिकल बैदेही। तजन चहत सुचि स्वामि सनेही।।
English explanation
Distraught Sita cannot find a reply; her pure-hearted, loving husband wishes to leave her behind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतरु | उत्तर | reply |
| न | नहीं | not |
| आव | आता, बन पड़ता | comes to her |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बैदेही | विदेह की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| तजन | छोड़ जाना | to leave behind |
| चहत | चाहते हैं | wishes |
| सुचि | पवित्र हृदय वाले | pure-hearted |
| स्वामि | पति राम | her husband Rama |
| सनेही | स्नेह करने वाले | loving |
2 बरबस रोकि बिलोचन बारी। धरि धीरजु उर अवनिकुमारी।।
English explanation
Sita, daughter of the earth, forcibly restrained her tears and steadied her heart with patience.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरबस | बलपूर्वक | forcibly |
| रोकि | रोककर | having restrained |
| बिलोचन | आँखों का | of the eyes |
| बारी | जल, आँसू | water, tears |
| धरि | धारण करके | having gathered |
| धीरजु | धैर्य | patience |
| उर | हृदय में | in her heart |
| अवनिकुमारी | पृथ्वी की पुत्री सीता | Sita, daughter of the earth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 396
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 396, 397
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।