अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी।।
मूल पाठ
लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी।।
दीन्हि प्रानपति मोहि सिख सोई। जेहि बिधि मोर परम हित होई।।
स्रोत अभिलेख 2.64 · पुस्तक पृ. 396, 397
भावार्थ
मूल पाठ के बादसासके पैर लगकर, हाथ जोड़कर कहने लगीं—हे देवि! मेरी इस बड़ी भारी ढिठाईको क्षमा कीजिये। मुझे प्राणपतिने वही शिक्षा दी है जिससे मेरा परम हित हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 397 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी।।
English explanation
Bowing at her mother-in-law's feet with folded hands, Sita says: Lady, forgive my great impertinence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागि | लगकर, प्रणाम करके | bowing at |
| सासु | सास कौसल्या के | of her mother-in-law Kausalya |
| पग | चरण | feet |
| कह | कहती हैं | says |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| छमबि | क्षमा कीजिए | please forgive |
| देबि | हे देवी | O revered lady |
| बड़ि | बड़ी | great |
| अबिनय | अविनय, धृष्टता | impertinence |
| मोरी | मेरी | my |
2 दीन्हि प्रानपति मोहि सिख सोई। जेहि बिधि मोर परम हित होई।।
English explanation
My dearly beloved husband has given me counsel directed toward my highest welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्हि | दी है | has given |
| प्रानपति | प्राणप्रिय पति राम ने | her dearly beloved husband Rama |
| मोहि | मुझे | to me |
| सिख | सीख, उपदेश | counsel |
| सोई | वही | that very |
| जेहि | जिस | by which |
| बिधि | रीति से | means |
| मोर | मेरा | my |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| हित | हित, भलाई | welfare |
| होई | हो | may be secured |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 397
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 396, 397
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