अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के।।
मूल पाठ
सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के।।
सीतल सिख दाहक भइ कैंसें। चकइहि सरद चंद निसि जैंसें।।
स्रोत अभिलेख 2.64 · पुस्तक पृ. 396, 397
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रियतमके कोमल तथा मनोहर वचन सुनकर सीताजीके सुन्दर नेत्र जलसे भर गये। श्रीरामजीकी यह शीतल सीख उनको कैसी जलानेवाली हुई, जैसे चकवीको शरद्-ऋतुकी चाँदनी रात होती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 396 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के।।
English explanation
AI-generated draft: Hearing her beloved husband's gentle, charming words, Sita's lovely eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| मनोहर | मन को भाने वाले | charming |
| पिय | प्रिय पति राम | beloved husband Rama |
| के | के | of |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| ललित | सुंदर | lovely |
| भरे | भर गए | filled |
| जल | आँसुओं से | with tears |
| सिय | सीता | Sita |
| के | के | of |
2 सीतल सिख दाहक भइ कैंसें। चकइहि सरद चंद निसि जैंसें।।
English explanation
How did soothing counsel become searing? Like the moon on an autumn night, which torments the separated female chakva bird.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीतल | शीतल, सुख पहुँचाने वाली | cooling, soothing |
| सिख | सीख, उपदेश | counsel |
| दाहक | जलाने वाली | searing |
| भइ | हो गई | became |
| कैंसें | कैसे | how |
| चकइहि | चकवी को | to the female chakva bird |
| सरद | शरद ऋतु का | autumn |
| चंद | चंद्रमा | moon |
| निसि | रात में | at night |
| जैंसें | जैसे | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 396
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 396, 397
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।