अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।।
मूल पाठ
उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।।
बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 535, 535
भावार्थ
मूल पाठ के बादयों कहकर लक्ष्मणजीने उठकर, हाथ जोड़कर आज्ञा माँगी। मानो वीररस सोतेसे जाग उठा हो। सिरपर जटा बँाधकर कमरमें तरकस कस लिया और धनुषको सजकर तथा बाणको हाथमें लेकर कहा—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 535 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।।
English explanation
Lakshmana rose, joined his hands, and sought his lord’s permission, as though the slumbering heroic spirit had awakened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठि | उठकर | having risen |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
| रजायसु | स्वामी की आज्ञा | his lord’s permission |
| मागा | माँगी | asked for |
| मनहुँ | मानो | as though |
| बीर | वीरता का | heroic |
| रस | रस; भाव | sentiment; spirit |
| सोवत | सोता हुआ | sleeping |
| जागा | जाग उठा | awakened |
2 बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा।।
English explanation
He tied his matted hair upon his head, fastened a quiver at his waist, and readied bow and arrow in his hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाँधि | बाँधकर | having tied |
| जटा | जटाएँ | matted locks |
| सिर | सिर पर | on his head |
| कसि | कसकर | having fastened tightly |
| कटि | कमर में | at his waist |
| भाथा | तरकस | quiver |
| साजि | तैयार करके | having readied |
| सरासनु | धनुष | bow |
| सायकु | बाण | arrow |
| हाथा | हाथ में | in his hands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 535
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 535
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।