अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआज मैं श्रीराम (आप) का सेवक होनेका यश लूँ और भरतको संग्राममें शिक्षा दूँ। श्रीरामचन्द्रजी (आप) के निरादरका फल पाकर दोनों भाई (भरत-शत्रुघ्र) रणशय्यापर सोवें!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 535 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।।
राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 535, 535
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।।
English explanation
Today I shall win renown as Rama’s servant and teach Bharata a lesson in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आजु | आज | today |
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| सेवक | सेवक होने का | as a servant |
| जसु | यश | renown |
| लेऊँ | मैं प्राप्त करूँ | I shall gain |
| भरतहि | भरत को | to Bharata |
| समर | युद्ध का | in battle |
| सिखावन | शिक्षा; पाठ | a lesson |
| देऊँ | मैं दूँ | I shall give |
2 राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई।।
English explanation
Receiving the consequence of disrespecting Rama, you two brothers shall sleep upon the bed of battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| निरादर | अनादर | disrespect |
| कर | का | of |
| फलु | फल; परिणाम | consequence |
| पाई | पाकर | having received |
| सोवहुँ | तुम सोओ | you shall sleep |
| समर | युद्ध की | of battle |
| सेज | शय्या | bed |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 535
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 535
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।