अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअच्छा हुआ जो सारा समाज आकर एकत्र हो गया। आज मैं पिछला सब क्रोध प्रकट करूँगा। जैसे सिंह हाथियोंके झुंडको कुचल डालता है और बाज जैसे लवेको लपेटमें ले लेता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 535 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।।
जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 535, 535
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।।
English explanation
It is well that this whole gathering has assembled; today I shall unleash my pent-up anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आइ | आकर | having come |
| बना | जुट गया; बन पड़ा | has assembled; has come about |
| भल | अच्छा | well; fortunate |
| सकल | सारा | entire |
| समाजू | जमावड़ा; समूह | gathering; company |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| करउँ | मैं करूँ | I shall make |
| रिस | क्रोध | anger |
| पाछिल | पिछला; पहले से संचित | earlier; pent-up |
| आजू | आज | today |
2 जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू।।
English explanation
As a lion crushes a herd of elephants, and as a hawk swoops upon and seizes a small lark.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | as |
| करि | हाथियों का | of elephants |
| निकर | झुंड | herd |
| दलइ | कुचल देता है | crushes |
| मृगराजू | सिंह | lion |
| लेइ | ले लेता है; पकड़ता है | takes; seizes |
| लपेटि | झपटकर समेटते हुए | swooping upon and enfolding |
| लवा | लवा नाम का छोटा पक्षी | a small lark |
| जिमि | जैसे | as |
| बाजू | बाज पक्षी | hawk |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 535
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 535
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।