अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।।
मूल पाठ
तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।।
जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 535, 535
भावार्थ
मूल पाठ के बादवैसे ही भरतको सेनासमेत और छोटे भाईसहित तिरस्कार करके मैदानमें पछाड़ूँगा। यदि शङ्करजी भी आकर उनकी सहायता करें, तो भी, मुझे रामजीकी सौगन्ध है, मैं उन्हें युद्धमें [अवश्य] मार डालूँगा (छोड़ूँगा नहीं)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 535 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।।
English explanation
In just that way, I shall crush Bharata, together with his army and younger brother, and strike them down on the battlefield.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तैसेहिं | ठीक उसी तरह | in just that way |
| भरतहि | भरत को | Bharata |
| सेन | सेना | army |
| समेता | सहित | together with |
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| निदरि | कुचलकर; रौंदकर | having crushed; trampled |
| निपातउँ | मैं मार गिराऊँ | I shall strike down |
| खेता | रणक्षेत्र में | on the battlefield |
2 जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई।।
English explanation
Even if Shiva comes to their aid, I shall strike them down in battle—I swear by Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| सहाय | सहायता | help |
| कर | करें | gives; provides |
| संकरु | शंकर; भगवान शिव | Shiva |
| आई | आकर | having come |
| तौ | तब भी | even then |
| मारउँ | मैं मार गिराऊँ | I shall strike down |
| रन | युद्ध में | in battle |
| राम | राम की | by Rama |
| दोहाई | दुहाई; शपथ | solemn invocation; oath |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 535
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 535
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।