अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ईस रजाइ सीस सबही कें। उतपति थिति लय बिषहु अमी कें।।
मूल पाठ
ईस रजाइ सीस सबही कें। उतपति थिति लय बिषहु अमी कें।।
देबि मोह बस सोचिअ बादी। बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी।।
स्रोत अभिलेख 2.282 · पुस्तक पृ. 579, 579
भावार्थ
मूल पाठ के बादईश्वरकी आज्ञा सभीके सिरपर है। उत्पत्ति, स्थिति (पालन) और लय (संहार) तथा अमृत और विषके भी सिरपर है (ये सब भी उसीके अधीन हैं)। हे देवि! मोहवश सोच करना व्यर्थ है। विधाताका प्रपञ्च ऐसा ही अचल और अनादि है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 579 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ईस रजाइ सीस सबही कें। उतपति थिति लय बिषहु अमी कें।।
English explanation
God’s command rests upon everyone; even the arising, continuance, and dissolution of poison and nectar are subject to it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ईस | ईश्वर की | God’s |
| रजाइ | आज्ञा; इच्छा | command; will |
| सीस | सिर पर | upon the head |
| सबही | सभी | everyone |
| कें | के | of |
| उतपति | उत्पत्ति | arising; creation |
| थिति | स्थिति; बने रहना | continuance; preservation |
| लय | लय; समाप्ति | dissolution |
| बिषहु | विष भी | even poison |
| अमी | अमृत | nectar of immortality |
| कें | के; विष और अमृत के | of poison and nectar |
2 देबि मोह बस सोचिअ बादी। बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी।।
English explanation
Lady, under attachment’s sway we grieve in vain; this unfolding of the Creator’s world is thus unchanging and beginningless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देबि | हे देवी | O lady |
| मोह | मोह; आसक्ति के | of attachment; delusion |
| बस | वश में | under the sway |
| सोचिअ | शोक किया जाता है | one grieves |
| बादी | व्यर्थ | in vain |
| बिधि | विधाता का | the Creator’s |
| प्रपंचु | विश्व-व्यापार; संसार का फैलाव | worldly unfolding; cosmic process |
| अस | ऐसा | such; thus |
| अचल | अटल; न बदलने वाला | fixed; unchanging |
| अनादी | जिसका आरंभ नहीं | beginningless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.282
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 579
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 579, 579
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।