अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूपति जिअब मरब उर आनी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमहाराजके मरने और जीनेकी बातको हृदयमें याद करके जो चिन्ता करती हैं, वह तो हे सखी! हम अपने ही हितकी हानि देखकर (स्वार्थवश) करती हैं। सीताजीकी माताने कहा—आपका कथन उत्तम और सत्य है। आप पुण्यात्माओंके सीमारूप अवधपति (महाराज दशरथजी) की ही तो रानी हैं। [फिर, भला ऐसा क्यों न कहेंगी]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 579 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भूपति जिअब मरब उर आनी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी।।
सीय मातु कह सत्य सुबानी। सुकृती अवधि अवधपति रानी।।
स्रोत अभिलेख 2.282 · पुस्तक पृ. 579, 579
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भूपति जिअब मरब उर आनी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी।।
English explanation
Friend, thinking in our hearts of the king’s living and dying, we grieve because we see a loss to our own welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा दशरथ का | of King Dasharatha |
| जिअब | जीना | living |
| मरब | मरना | dying |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आनी | लाकर; विचार करके | bringing to mind |
| सोचिअ | शोक करते हैं | we grieve |
| सखि | हे सखी | O friend |
| लखि | देखकर | seeing |
| निज | अपने | one’s own |
| हित | हित; कल्याण की | of welfare; well-being |
| हानी | हानि | loss |
2 सीय मातु कह सत्य सुबानी। सुकृती अवधि अवधपति रानी।।
English explanation
Sita’s mother says, ‘Your gracious words are true, O queen of Ayodhya’s lord; you are the very pinnacle of virtue.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता की | Sita’s |
| मातु | माता; सुनयना | mother, Sunayana |
| कह | कहती हैं | says |
| सत्य | सत्य; सही | true; right |
| सुबानी | सुंदर वाणी; आपकी उत्तम बात | gracious speech; your fine words |
| सुकृती | पुण्यशीलता की | of virtue; meritorious conduct |
| अवधि | पराकाष्ठा; सर्वोच्च सीमा | pinnacle; utmost limit |
| अवधपति | अयोध्या के राजा की | of the king of Ayodhya |
| रानी | हे रानी कौसल्या | O Queen Kaushalya |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.282
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 579
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 579, 579
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।