अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसल्या कह दोसु न काहू। करम बिबस दुख सुख छति लाहू।।
मूल पाठ
कौसल्या कह दोसु न काहू। करम बिबस दुख सुख छति लाहू।।
कठिन करम गति जान बिधाता। जो सुभ असुभ सकल फल दाता।।
स्रोत अभिलेख 2.282 · पुस्तक पृ. 579, 579
भावार्थ
मूल पाठ के बादकौसल्याजीने कहा—किसीका दोष नहीं है; दु:ख-सुख, हानि-लाभ सब कर्मके अधीन हैं। कर्मकी गति कठिन (दुॢवज्ञेय) है, उसे विधाता ही जानता है, जो शुभ और अशुभ सभी फलोंका देनेवाला है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 579 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कौसल्या कह दोसु न काहू। करम बिबस दुख सुख छति लाहू।।
English explanation
Kaushalya says that no one is to blame; sorrow, happiness, loss, and gain are governed by karma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | कौसल्या, राम की माता | Kaushalya, Rama’s mother |
| कह | कहती हैं | says |
| दोसु | दोष | fault; blame |
| न | नहीं | not |
| काहू | किसी का | anyone’s |
| करम | कर्म के | of karma |
| बिबस | अधीन | subject to |
| दुख | दुःख | sorrow |
| सुख | सुख | happiness |
| छति | हानि | loss |
| लाहू | लाभ | gain |
2 कठिन करम गति जान बिधाता। जो सुभ असुभ सकल फल दाता।।
English explanation
The Creator knows the inscrutable workings of karma and bestows all its favorable and unfavorable fruits.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कठिन | गूढ़; समझने में कठिन | inscrutable; hard to understand |
| करम | कर्म की | of karma |
| गति | गति; कार्यप्रणाली | course; workings |
| जान | जानते हैं | knows |
| बिधाता | विधाता; फल देने वाले सृष्टिकर्ता | the Creator, who dispenses results |
| जो | जो | who |
| सुभ | शुभ; अनुकूल | favorable; auspicious |
| असुभ | अशुभ; प्रतिकूल | unfavorable; inauspicious |
| सकल | सभी | all |
| फल | कर्मफल | fruits of actions |
| दाता | देने वाले | bestower |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.282
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 579
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 579, 579
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