अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा। बिधि गति बड़ि बिपरीत बिचित्रा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह सुनकर देवी सुमित्राजी शोकके साथ कहने लगीं—विधाताकी चाल बड़ी ही विपरीत और विचित्र है, जो सृष्टिको उत्पन्न करके पालता है और फिर नष्ट कर डालता है। विधाताकी बुद्धि बालकोंके खेलके समान भोली (विवेकशून्य) है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 579 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा। बिधि गति बड़ि बिपरीत बिचित्रा।।
जो सृजि पालइ हरइ बहोरी। बाल केलि सम बिधि मति भोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.282 · पुस्तक पृ. 579, 579
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा। बिधि गति बड़ि बिपरीत बिचित्रा।।
English explanation
This is an AI-generated draft interpretation. Hearing this, Queen Sumitra says sorrowfully that the Creator’s ways are very contrary and strange.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| ससोच | शोक सहित | sorrowfully |
| कह | कहती हैं | says |
| देबि | देवी; आदरणीय रानी | revered queen |
| सुमित्रा | सुमित्रा, लक्ष्मण की माता | Sumitra, Lakshmana’s mother |
| बिधि | विधाता की | the Creator’s |
| गति | चाल; कार्य करने का ढंग | ways; manner of working |
| बड़ि | बहुत | very |
| बिपरीत | विपरीत; अपेक्षा के उलट | contrary to expectations |
| बिचित्रा | विचित्र | strange |
2 जो सृजि पालइ हरइ बहोरी। बाल केलि सम बिधि मति भोरी।।
English explanation
He creates, sustains, and then destroys; the Creator’s understanding is naive, like a child’s play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो विधाता | who, the Creator |
| सृजि | रचकर | having created |
| पालइ | पालन करता है | sustains |
| हरइ | नष्ट कर देता है | destroys |
| बहोरी | फिर | then; again |
| बाल | बालक का | a child’s |
| केलि | खेल | play |
| सम | के समान | like |
| बिधि | विधाता की | the Creator’s |
| मति | बुद्धि | understanding |
| भोरी | भोली; अपरिपक्व | naive; immature |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.282
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 579
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 579, 579
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।