अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आयसु होइ त रहौं सनेमा। बोले मुनि तन पुलकि सपेमा।।
मूल पाठ
आयसु होइ त रहौं सनेमा। बोले मुनि तन पुलकि सपेमा।।
समुझव कहब करब तुम्ह जोई। धरम सारु जग होइहि सोई।।
स्रोत अभिलेख 2.323 · पुस्तक पृ. 613, 614
भावार्थ
मूल पाठ के बादआज्ञा हो तो मैं नियमपूर्वक रहूँ! मुनि वसिष्ठजी पुलकितशरीर हो प्रेमके साथ बोले—हे भरत! तुम जो कुछ समझोगे, कहोगे और करोगे, वही जगत्में धर्मका सार होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 614 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आयसु होइ त रहौं सनेमा। बोले मुनि तन पुलकि सपेमा।।
English explanation
Bharata said: If you permit, I shall live under prescribed discipline. The sage spoke lovingly, his body thrilled with emotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा | permission |
| होइ | हो | is granted |
| त | तो | then |
| रहौं | मैं रहूँ | I may live |
| सनेमा | नियम और संयम सहित | with discipline and observances |
| बोले | बोले | spoke |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ | the sage Vashishtha |
| तन | शरीर | body |
| पुलकि | रोमांचित होकर | thrilling with emotion |
| सपेमा | प्रेम सहित | with love |
2 समुझव कहब करब तुम्ह जोई। धरम सारु जग होइहि सोई।।
English explanation
The sage said: Whatever you understand, say, and do will be the essence of righteousness in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझव | समझोगे | you will understand |
| कहब | कहोगे | you will say |
| करब | करोगे | you will do |
| तुम्ह | तुम | you |
| जोई | जो कुछ | whatever |
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| सारु | सार | essence |
| जग | संसार में | in the world |
| होइहि | होगा | will be |
| सोई | वही | that very thing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 614
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 614
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।