अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परिजन पुरजन प्रजा बोलाए। समाधानु करि सुबस बसाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजीने फिर परिवारके लोगोंको, नागरिकोंको तथा अन्य प्रजाको बुलाकर, उनका समाधान करके उनको सुखपूर्वक बसाया। फिर छोटे भाई शत्रुघ्रजीसहित वे गुरुजीके घर गये और दण्डवत् करके हाथ जोड़कर बोले—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 614 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
परिजन पुरजन प्रजा बोलाए। समाधानु करि सुबस बसाए।।
सानुज गे गुर गेहँ बहोरी। करि दंडवत कहत कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.323 · पुस्तक पृ. 613, 614
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परिजन पुरजन प्रजा बोलाए। समाधानु करि सुबस बसाए।।
English explanation
Bharata summoned his household, the townspeople, and the subjects; he reassured them and settled them under proper arrangements.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिजन | परिवार और निकटवर्ती लोगों को | family and household members |
| पुरजन | नगरवासियों को | the townspeople |
| प्रजा | प्रजा को | the subjects |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| समाधानु | समझा-बुझाकर संतुष्ट करना | reassurance; resolving concerns |
| करि | करके | having done |
| सुबस | अच्छी व्यवस्था में | in good order |
| बसाए | बसाया; व्यवस्थित किया | settled; arranged for |
2 सानुज गे गुर गेहँ बहोरी। करि दंडवत कहत कर जोरी।।
English explanation
Then Bharata went with his younger brother to the guru’s home. After prostrating himself, he spoke with joined hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| गे | गए | went |
| गुर | गुरु वसिष्ठ के | of his guru, Vashishtha |
| गेहँ | घर में; घर को | to the home |
| बहोरी | फिर | then; again |
| करि | करके | having made |
| दंडवत | भूमि पर लेटकर प्रणाम | full prostration |
| कहत | कहने लगे | began to say |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | joining together |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 614
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 614
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।