अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूसुर बोलि भरत कर जोरे। करि प्रनाम बय बिनय निहोरे।।
मूल पाठ
भूसुर बोलि भरत कर जोरे। करि प्रनाम बय बिनय निहोरे।।
ऊँच नीच कारजु भल पोचू। आयसु देब न करब सँकोचू।।
स्रोत अभिलेख 2.323 · पुस्तक पृ. 613, 614
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्राह्मणोंको बुलाकर भरतजीने हाथ जोड़कर प्रणाम कर अवस्थाके अनुसार विनय और निहोरा किया कि आपलोग ऊँचा-नीचा (छोटा-बड़ा), अच्छा-मन्दा जो कुछ भी कार्य हो, उसके लिये आज्ञा दीजियेगा। संकोच न कीजियेगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 614 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भूसुर बोलि भरत कर जोरे। करि प्रनाम बय बिनय निहोरे।।
English explanation
Bharata called the Brahmins, joined his hands, bowed, and made humble requests. The reading ‘बय’ is unclear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूसुर | ब्राह्मणों को | the Brahmins |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| कर | हाथ | hands |
| जोरे | जोड़े | joined together |
| करि | करके | having made |
| प्रनाम | प्रणाम | a respectful bow |
| बय | बहुत; अनेक विनम्र प्रार्थनाएँ और अनुरोध करके। | Much or many; making numerous humble requests and entreaties. |
| बिनय | विनय; नम्र निवेदन | humble entreaty |
| निहोरे | अनुरोध; प्रार्थनाएँ | requests; entreaties |
2 ऊँच नीच कारजु भल पोचू। आयसु देब न करब सँकोचू।।
English explanation
Bharata said: Whether a task is high or low, worthy or humble, please command me without hesitation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऊँच | बड़ा; उच्च श्रेणी का | high; important |
| नीच | छोटा; निम्न श्रेणी का | low; minor |
| कारजु | कार्य | task |
| भल | अच्छा; प्रतिष्ठित | good; worthy |
| पोचू | साधारण; तुच्छ समझा जाने वाला | humble; considered lowly |
| आयसु | आदेश | command |
| देब | दीजिए | please give |
| न | मत | do not |
| करब | कीजिए | make; exercise |
| सँकोचू | संकोच | hesitation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 614
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 614
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।