अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे। निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे।।
मूल पाठ
सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे। निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे।।
पुनि सिख दीन्ह बोलि लघु भाई। सौंपी सकल मातु सेवकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.323 · पुस्तक पृ. 613, 614
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीने मन्त्रियों और विश्वासी सेवकोंको समझाकर उद्यत किया। वे सब सीख पाकर अपने- अपने काममें लग गये। फिर छोटे भाई शत्रुघ्रजीको बुलाकर शिक्षा दी और सब माताओंकी सेवा उनको सौंपी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 613 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे। निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Bharata instructed the ministers and faithful servants. Receiving their respective duties and instructions, they attended to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिव | मंत्रियों को | the ministers |
| सुसेवक | अच्छे और निष्ठावान सेवकों को | the faithful servants |
| भरत | भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| प्रबोधे | समझाया; निर्देश दिए | instructed; counseled |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| काज | कार्य | duties |
| पाइ | पाकर | receiving |
| पाइ | प्रत्येक ने पाकर | each receiving |
| सिख | निर्देश | instructions |
| ओधे | कार्य में लगे | applied themselves to their duties |
2 पुनि सिख दीन्ह बोलि लघु भाई। सौंपी सकल मातु सेवकाई।।
English explanation
Then Bharata called his younger brother, instructed him, and entrusted him with serving all the mothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| सिख | निर्देश | instructions |
| दीन्ह | दिए | gave |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| लघु | छोटे | younger |
| भाई | भाई शत्रुघ्न को | his brother Shatrughna |
| सौंपी | सौंप दी | entrusted |
| सकल | सभी | all |
| मातु | माताओं की | of the mothers |
| सेवकाई | सेवा | service; care |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 613
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 614
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।