अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आन उपाउ न देखिअ देवा। मानत रामु सुसेवक सेवा।।
मूल पाठ
आन उपाउ न देखिअ देवा। मानत रामु सुसेवक सेवा।।
हियँ सपेम सुमिरहु सब भरतहि। निज गुन सील राम बस करतहि।।
स्रोत अभिलेख 2.265 · पुस्तक पृ. 564, 565
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे देवताओ! और कोई उपाय नहीं दिखायी देता। श्रीरामजी अपने श्रेष्ठ सेवकोंकी सेवाको मानते हैं (अर्थात् उनके भक्तकी कोई सेवा करता है तो उसपर बहुत प्रसन्न होते हैं)। अतएव अपने गुण और शीलसे श्रीरामजीको वशमें करनेवाले भरतजीका ही सब लोग अपने-अपने हृदयमें प्रेमसहित स्मरण करो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 565 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आन उपाउ न देखिअ देवा। मानत रामु सुसेवक सेवा।।
English explanation
O gods, no other remedy is apparent; Rama honors the service of a devoted servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आन | दूसरा | another |
| उपाउ | उपाय | remedy |
| न | नहीं | not |
| देखिअ | दिखाई देता | is seen; is apparent |
| देवा | हे देवताओं | O gods |
| मानत | मान देते हैं; स्वीकार करते हैं | honors; accepts |
| रामु | राम | Rama |
| सुसेवक | अच्छे, निष्ठावान सेवक की | of a good, devoted servant |
| सेवा | सेवा | service |
2 हियँ सपेम सुमिरहु सब भरतहि। निज गुन सील राम बस करतहि।।
English explanation
All of you lovingly remember Bharata in your hearts; through his virtues and noble conduct, he wins Rama over.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हियँ | हृदय में | in your hearts |
| सपेम | प्रेम सहित | with love |
| सुमिरहु | स्मरण करो | remember |
| सब | तुम सभी | all of you |
| भरतहि | भरत को | Bharata |
| निज | अपने | his own |
| गुन | गुणों से | through virtues |
| सील | शील; सदाचरण से | through noble character and conduct |
| राम | राम को | Rama |
| बस | वश में | under his sway |
| करतहि | करते हैं | brings; wins over |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.265
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 565
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 564, 565
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