अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अहिप महिप जहँ लगि प्रभुताई। जोग सिद्धि निगमागम गाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशेषजी और [पृथ्वी एवं पातालके अन्यान्य] राजा आदि जहाँतक प्रभुता है, और योगकी सिद्धियाँ, जो वेद और शास्त्रोंमें गायी गयी हैं, हृदयमें अच्छी तरह विचार कर देखो, [तो यह स्पष्ट दिखायी देगा कि] श्रीरामजीकी आज्ञा इन सभीके सिरपर है (अर्थात् श्रीरामजी ही सबके एकमात्र महान् महेश्वर हैं)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 556 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अहिप महिप जहँ लगि प्रभुताई। जोग सिद्धि निगमागम गाई।।
करि बिचार जिंयँ देखहु नीकें। राम रजाइ सीस सबही कें।।
स्रोत अभिलेख 2.254 · पुस्तक पृ. 555, 556
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अहिप महिप जहँ लगि प्रभुताई। जोग सिद्धि निगमागम गाई।।
English explanation
The serpent king, earthly kings, every extent of dominion, and the yoga and spiritual powers described in the Vedas and Agamas—all fall under Rama’s command, as the next line states.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहिप | नागों के स्वामी शेष | Shesha, lord of serpents |
| महिप | पृथ्वी के राजा | earthly kings |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| लगि | तक | as far as |
| प्रभुताई | प्रभुता या अधिकार है | dominion extends |
| जोग | योग | yoga |
| सिद्धि | आध्यात्मिक सिद्धियाँ | spiritual attainments and powers |
| निगमागम | वेदों और आगमों में | in the Vedas and Agamas |
| गाई | वर्णित | celebrated or described |
2 करि बिचार जिंयँ देखहु नीकें। राम रजाइ सीस सबही कें।।
English explanation
Reflect within your heart and see clearly: Rama’s command rests upon everyone’s head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having undertaken |
| बिचार | विचार | reflection |
| जिंयँ | मन में | in your heart |
| देखहु | देखो, समझो | see and understand |
| नीकें | भलीभाँति | clearly and carefully |
| राम | राम की | Rama’s |
| रजाइ | आज्ञा | command |
| सीस | सिर पर | upon the head |
| सबही | सभी | everyone |
| कें | के | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.254
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 556
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 555, 556
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।