अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नीति प्रीति परमारथ स्वारथु। कोउ न राम सम जान जथारथु।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनीति, प्रेम, परमार्थ और स्वार्थको श्रीरामजीके समान यथार्थ (तत्त्वसे) कोई नहीं जानता। ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, चन्द्र, सूर्य, दिक्पाल, माया, जीव, सभी कर्म और काल॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 555 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नीति प्रीति परमारथ स्वारथु। कोउ न राम सम जान जथारथु।।
बिधि हरि हरु ससि रबि दिसिपाला। माया जीव करम कुलि काला।।
स्रोत अभिलेख 2.254 · पुस्तक पृ. 555, 556
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नीति प्रीति परमारथ स्वारथु। कोउ न राम सम जान जथारथु।।
English explanation
No one understands right policy, love, the highest good, and one’s own interests as truly as Rama does.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीति | उचित आचरण और नीति | right conduct and policy |
| प्रीति | प्रेम | love |
| परमारथ | परम हित | the highest good |
| स्वारथु | अपना हित | one’s own interests |
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| राम | राम के | Rama |
| सम | समान | as well as |
| जान | जानता है | knows |
| जथारथु | यथार्थ रूप में | truly |
2 बिधि हरि हरु ससि रबि दिसिपाला। माया जीव करम कुलि काला।।
English explanation
Brahma, Vishnu, Shiva, the moon, the sun, the guardians of the directions, maya, living beings, karma, and Time—the list continues; the meaning of “कुलि” here is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| हरि | विष्णु | Vishnu, the preserver |
| हरु | शिव | Shiva |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| रबि | सूर्य | the sun |
| दिसिपाला | दिशाओं के रक्षक देवता | guardian deities of the directions |
| माया | माया | maya, the power of cosmic appearance |
| जीव | जीवात्माएँ | individual souls |
| करम | कर्म | karma |
| कुलि | सब, समस्त; उल्लिखित शक्तियाँ और तत्त्व सामूहिक रूप से। | All or collectively, referring to the listed powers and principles. |
| काला | काल | Time |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.254
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 555
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 555, 556
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।