अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि केहि देइअ दोसू। ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा विचारकर किसे दोष दिया जाय? और व्यर्थ किसपर क्रोध किया जाय? हे तात! मनमें विचार करो। राजा दशरथ सोच करनेके योग्य नहीं हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 486 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस बिचारि केहि देइअ दोसू। ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू।।
तात बिचारु केहि करहु मन माहीं। सोच जोगु दसरथु नृपु नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.172 · पुस्तक पृ. 486, 486
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिचारि केहि देइअ दोसू। ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू।।
English explanation
Considering this, whom should one blame? At whom should one be angry in vain?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| केहि | किसे | to whom |
| देइअ | दिया जाए | should be given |
| दोसू | दोष | blame |
| ब्यरथ | व्यर्थ | in vain |
| काहि | किस | whom |
| पर | पर | at |
| कीजिअ | किया जाए | should be directed |
| रोसू | क्रोध | anger |
2 तात बिचारु केहि करहु मन माहीं। सोच जोगु दसरथु नृपु नाहीं।।
English explanation
Dear son, consider in your heart whom one should grieve for. King Dasharatha is not someone to be mourned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे तात | dear son |
| बिचारु | विचार | reflection |
| केहि | किसके विषय में | about whom |
| करहु | करो | do |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
| सोच | शोक | grief |
| जोगु | योग्य | deserving of |
| दसरथु | दशरथ | Dasharatha, Rama’s father |
| नृपु | राजा | king |
| नाहीं | नहीं हैं | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.172
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 486
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 486, 486
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।