अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।।
मूल पाठ
अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।।
रमेउ राम मनु देवन्ह जाना। चले सहित सुर थपति प्रधाना।।
स्रोत अभिलेख 2.133 · पुस्तक पृ. 454, 455
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर लक्ष्मणजीने स्थान दिखलाया। स्थानको देखकर श्रीरामचन्द्रजीने सुख पाया। जब देवताओंने जाना कि श्रीरामचन्द्रजीका मन यहाँ रम गया तब वे देवताओंके प्रधान थवई (मकान बनानेवाले) विश्वकर्माको साथ लेकर चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 454 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।।
English explanation
Having said this, Lakshmana showed the place. Seeing the site, Rama was pleased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| ठाउँ | स्थान | the place |
| देखरावा | दिखाया | showed |
| थलु | स्थल को | the site |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ राम ने | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| सुखु | प्रसन्नता | delight |
| पावा | पाई | felt; obtained |
2 रमेउ राम मनु देवन्ह जाना। चले सहित सुर थपति प्रधाना।।
English explanation
The gods realized that Rama’s heart delighted in the place. They set out with the chief architect of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रमेउ | रम गया; प्रसन्न हुआ | delighted; became content |
| राम | राम का | Rama’s |
| मनु | मन | heart; mind |
| देवन्ह | देवताओं ने | the gods |
| जाना | जान लिया | recognized |
| चले | चल पड़े | set out |
| सहित | साथ लेकर | together with |
| सुर | देवताओं का | of the gods |
| थपति | शिल्पी; वास्तुकार | architect; master craftsman |
| प्रधाना | प्रधान | chief |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.133
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 454
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 454, 455
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।