अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरुजीकी आज्ञा मानकर तो श्रीरामजी अवश्य ही अयोध्याको लौट चलेंगे। परन्तु मुनि वसिष्ठजी तो श्रीरामचन्द्रजीकी रुचि जानकर ही कुछ कहेंगे (अर्थात् वे श्रीरामजीकी रुचि देखे बिना जानेको नहीं कहेंगे)। माता कौसल्याजीके कहनेसे भी श्रीरघुनाथजी लौट सकते हैं; पर भला, श्रीरामजीको जन्म देनेवाली माता क्या कभी हठ करेगी?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 554 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी।।
मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ। राम जननि हठ करबि कि काऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.253 · पुस्तक पृ. 554, 555
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी।।
English explanation
Rama would certainly return in obedience to the guru's command; but the sage would speak only after discerning Rama's wishes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवसि | अवश्य | certainly |
| फिरहिं | लौटेंगे | will return |
| गुर | गुरु की | the guru's |
| आयसु | आज्ञा | command |
| मानी | मानकर | obeying |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ | the sage Vasishtha |
| पुनि | पर फिर | but then |
| कहब | कहेंगे | will speak |
| राम | राम की | Rama's |
| रुचि | इच्छा | wish |
| जानी | जानकर | having discerned |
2 मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ। राम जननि हठ करबि कि काऊ।।
English explanation
Rama would also return at his mother's request; but would Rama's mother ever insist?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता कौसल्या के | mother Kaushalya's |
| कहेहुँ | कहने पर भी | even at her request |
| बहुरहिं | लौटेंगे | will return |
| रघुराऊ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu's line |
| राम | राम की | Rama's |
| जननि | माता कौसल्या | mother Kaushalya |
| हठ | हठ | insistence |
| करबि | करेंगी | will make |
| कि | क्या | would |
| काऊ | कभी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.253
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 554
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 554, 555
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।