अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब तुम्ह बिनय मोरि सुनि लेहू। मोहि अनुहरत सिखावनु देहू।।
मूल पाठ
अब तुम्ह बिनय मोरि सुनि लेहू। मोहि अनुहरत सिखावनु देहू।।
ऊतरु देउँ छमब अपराधू। दुखित दोष गुन गनहिं न साधू।।
स्रोत अभिलेख 2.177 · पुस्तक पृ. 490, 491
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब आपलोग मेरी विनती सुन लीजिये और मेरी योग्यताके अनुसार मुझे शिक्षा दीजिये। मैं उत्तर दे रहा हूँ, यह अपराध क्षमा कीजिये। साधु पुरुष दुखी मनुष्यके दोष-गुणोंको नहीं गिनते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 490 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब तुम्ह बिनय मोरि सुनि लेहू। मोहि अनुहरत सिखावनु देहू।।
English explanation
Now please hear my plea and give me counsel suited to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| तुम्ह | आप | you |
| बिनय | विनती | plea; humble request |
| मोरि | मेरी | my |
| सुनि | सुन | hear |
| लेहू | लीजिए | please do |
| मोहि | मुझे | to me |
| अनुहरत | अनुरूप; अनुकूल | suited; appropriate |
| सिखावनु | शिक्षा; सलाह | instruction; counsel |
| देहू | दीजिए | please give |
2 ऊतरु देउँ छमब अपराधू। दुखित दोष गुन गनहिं न साधू।।
English explanation
I am speaking in reply; please forgive this offense. Good people do not count the faults and virtues of someone in distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऊतरु | उत्तर; प्रत्युत्तर | reply; rejoinder |
| देउँ | मैं देता हूँ | I give |
| छमब | क्षमा कीजिए | please forgive |
| अपराधू | अपराध | offense |
| दुखित | दुखी व्यक्ति के | of a distressed person |
| दोष | दोष | faults |
| गुन | गुण | virtues |
| गनहिं | गिनते; विचारते हैं | count; assess |
| न | नहीं | not |
| साधू | साधु; सज्जन | saintly; good people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.177
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 490
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 490, 491
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।