अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब कृपाल मोहि सो मत भावा। सकुच स्वामि मन जाइँ न पावा।।
मूल पाठ
अब कृपाल मोहि सो मत भावा। सकुच स्वामि मन जाइँ न पावा।।
प्रभु पद सपथ कहउँ सति भाऊ। जग मंगल हित एक उपाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.269 · पुस्तक पृ. 567, 568
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे कृपालु! अब तो वही मत मुझे भाता है, जिससे स्वामीका मन संकोच न पावे। प्रभुके चरणोंकी शपथ है, मैं सत्य भावसे कहता हूँ, जगत्के कल्याणके लिये एक यही उपाय है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 568 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब कृपाल मोहि सो मत भावा। सकुच स्वामि मन जाइँ न पावा।।
English explanation
Now, compassionate Lord, I favor the course that allows no hesitation to enter my master’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| कृपाल | हे कृपालु | O compassionate Lord |
| मोहि | मुझे | to me |
| सो | वही | that very |
| मत | विचार; उपाय | proposal; course |
| भावा | अच्छा लगा | appeals |
| सकुच | संकोच | hesitation |
| स्वामि | स्वामी के | the master’s |
| मन | मन में | into the heart |
| जाइँ | जाने | to enter |
| न | नहीं | not |
| पावा | पा सके | be able |
2 प्रभु पद सपथ कहउँ सति भाऊ। जग मंगल हित एक उपाऊ।।
English explanation
Swearing by the Lord’s feet, I state my true feeling: there is one course for the welfare of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| पद | चरणों की | feet |
| सपथ | शपथ लेकर | swearing by |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I state |
| सति | सच्चा | true |
| भाऊ | भाव; मन की भावना | feeling; heartfelt intention |
| जग | जगत के | of the world |
| मंगल | कल्याण | welfare |
| हित | के लिए | for |
| एक | एक | one |
| उपाऊ | उपाय | course; means |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.269
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 568
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 567, 568
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